Tuesday, 10 December 2013

अचानक सामने खड़े बडे लड़के पर गया जो सामने बाबू
की  विचार मग्नता को  देख मन्द मन्द मुस्करा रहा था।
“बाबू क्या सोच रहे हो?”  लड़का मुस्कुराता हुआ बोला. वैचारिक  तन्द्रा से मुक्त होने के लिये बचाऊ अपना कन्धा झटकते हुए उससे कहा ”कुछ नहीं”.चल माँ के पास चले।                       
        यू समय अबाध गति से कई कई भवरे बनता जा रहा था. दूसरी वीवी ने समय समय पर एक कन्या और दो पुत्रो का तोहफ़ा पति को दिया।जिसमे से एक लड़की और एक लड़का धीरे धीरे जवान हो चुके थे।तीसरा अभी छोटा था।इसलिये लड़की के ब्याह की चिन्ता माँ को खाए जा रही थी,क्योकी गाँव में लोग दूसरो के घर की बातो को लेकर आपस में काना फूसी करने मे काफी रुचि लिया करते है।उसे अपनी लड़की के लिये हो रही काना फूसी की खबर मिल रही थी। भला वह किसका किसका मुह बंद करेगी. ऐसे में दुश्मन, दुश्मन का हितैसी बन अचानक वह सक्रिय  हो जाता है।रन्नो की माँ जो उसकी प्रबल दुश्मन थी बचाऊ के लड़की की शादी मे विलम्ब होने की बात को नमक मिर्च लगा घर घर में खूब प्रचारित कर रही थी जिसे सुन वह अंदर से भड़क जाती थी। बचाऊ की पत्नी लड़की की यथा शीघ्र शादी कर उसका मुह बंद कर उसे मुहतोड़ जबाब देना चाहती थी।सोच रही थी कि एक दिन लड़की का ब्याह तो होना ही है तो क्यों न अभी ही कर दिया जाय।
    बचाऊ अपने पुत्र फेकू के साथ उसके सामने खड़ा मुस्करा रहा था और पत्नी उससे बेखबर चिन्ता मग्न थी।“अम्मा देख बाबू कब से खड़े है”।फेकू ने माँ को झिझोरते हुए कहा तो सहसा उसका ध्यान भंग हुआ. मुस्कराते हुए सामने बचाऊ को देख उसे वह उपस्थित दुश्मन सा लगा और सहसा वह लाल मिर्च की तरह तल्ख़ हो उठी

   “कहा खोई रहती हो. कोई सामने खड़ा हो तब भी नहीं देखती”।बचाऊ ने मुस्कराते हुए कहा”। उसकी चिंता अब क्रोध में बदल गई थी- अरे तुम्हे क्या हथेली पर सुर्ती मला,उसे मुह मे दबाया और कपड़ा का गट्ठर उठा बस घाट पर चल दिये।बचाऊ उसके द्वारा अपने उपर सहसा फेके गए ब्यंग बा से  तिलमिला उठा किन्तु शांत रहा.जानता था कि कर्कसा है.बिना धोये यह सुध्ररने से रही। फिर भी अपने को सयत कर उससे पूछा. क्या हुआ कुछ बताओगी भी? अरे बताने का क्या लाभ, तुम करोगे तो अपने मन की ही. जानते हो लड़की की शादी को लेकर गाँव में कैसी कैसी बाते हो रही है रोती  हुई  वह बोली.दिल का दर्द वाणी मे छ्लक आया था।
बातो का क्या. लोग तो  बड़े बड़े नेताओ को भी नहीं छोड़ते तो हम लोगो की क्या गिनतीअगर हम सही हैं तो हमें किसी की परवाह नहीं करना चाहिए बचाऊ प्यार से बोला
हम बड़े बड़े नेताओ की तरह निर्लज्ज तो नहींहमें अपने समाज के मर्यादा के अनुसार चलना हैलड़की की शादी यदि अबतक हम कर देते तो किसी को कुछ कहने की हिम्मत तो न होतीवह तैश में बोली।“अरे अभी तो वह अठारह की भी नहीं है,अभी पूरे दो माह कम है, कानूनन लड़की की शादी अठारह वर्ष पूरा होने पर ही करना चाहिए बचाऊ बोला.
    हा हा तो जब तक जी में आये  घर मे बिटिया को बिठाये रखो और लोगो के टेढ़ी निगाहों का बेशर्मी से सामना करतेरहो.आपको तो फर्ज से भागने का बस बहाना चाहिए वह बोली.
    बचाऊ जानता था कि औरत जब किसी तरंग में आ जाय तो उसे उस समय उसकी  बात से उसे  हटाना कितना मुश्किल है. इस कारण वह भुनभुनाता हुआ बाहर चला गयाआखिर उसका अपना जो एक मनोंविज्ञान जो होता है
          बचाऊ के मस्त मिजाज में अचानक गंभीरता आ गयी तथा उसका दिमाग अचानक तेजी से घूम उठा।सोचने लगा भले ही बिटिया की उम्र अभी अठारह वर्ष से कुछ कम है लेकिन शादी में दहेज़ की ब्यवस्था तुरंत तो नहीं हो सकतीइसके लिये पहले से ही सामानों का जुगाड़ करना होगा। मानाकि विरादरी मे बहुत गरीब नहीं हूँ फिर भी इतनी अवकात नहीं कि आनन फ़ानन रूपया फेक कर शादी की पूरी ब्यवस्था कर दू।वह सोचने लगा कि इसके लिये तो उसको  जुगाड़ तकनीक का सहारा तो लेना ही पड़ेगा गाँव के अगाड़ी जाति के लोग ऐसी स्थित में पुराने समय से ही हमलोगों पर कृपावान होकर कुछ न कुछ मदद करते ही आये है.भले ही पिछडे जाति के नेता उनके प्रति अपने कुर्सी स्वार्थ में उनके लिये नकारात्मक माहौल बनाने के लिये जहर उगलकर सामाजिक सौहार्द ख़राब करेये धूर्त नेता बखूबी जानते है कि हम पिछड़े लोगो की बुद्धि भी पिछड़ी होती है और उसे बरगलाकर जल्दी से उत्तेजित की जा सकती हैवो ये भी जानते है कि अच्छे माहौल की जगह गलत माहौल बनाकर अपना उल्लू सीधा किया जाना ज्यादा आसान होता है सो स्वार्थी नेता करते ही है वह जानता था कि गाँव के बाबू साहब व पंडित जी लोग अपने अपने तरह से लड़की की शादी में सहृदय होकर कुछ न कुछ  देगे हीबस लड़की के शादी की बात बताकर उनकी थाह लेने की जरुरत है।बचाऊ सोचने लगा कि अब लड़का ढूढना शुरु करना चाहिए इससे पत्नी को भी सकून होगा. किन्तु लड़की के लिये वर ढूढना भी कोई आसन काम नहीं है कि सामने जो लड़का मिला उसे पकड़ कर ले आये.वर ढूढने में बहुत सी बाते देखनी ही  पड़ती है.घर बार उनकी आदते आदि आदि।                                                                              क्र्मश:

1 comment:

  1. कृपया आगे का अंश पोस्ट करे I

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