भैया किस समाज कि बात करते है? वही जो गरीबो का नही है।समाज भी ताकतवर का ही साथ देता हैं। यदि नेता मन्त्री,फ़िल्मी कलाकार या कोई धनवान आदमी गैर धर्म जाति मे विवाह कर ले तो वह महान है क्योकि उसने धर्म जाति की बेडी तोडी है्।किन्तु जब कोई गरीब एसा करे तो समाज मे थू थू।जहा समाज मे आदमी के लिये दो मापद्न्ड हो तो उस सडे समाज को छोड्ने मे ही भलाई है और बुद्धिमान यही करते भी है।रोटी,कपडा मकान हम अपनी मेहनत से जुटाते है समाज हमे मुफ़्त मे नही देता।फिर समाज की इतनी चिन्ता क्यो?कतवारु अपनी खुशी को निहारो और एसी लड्की घर मे लाओ जो घर मे अपने गुणो से आपके घर मे खुशिया ला सके।मै तुम्हारा इस नेक काम मे साथ दूगा।शादी करो या न करो क्योकि वह तो उपर वाले की मर्जी से होती है, लेकिन कहूगा कि एक बार अपने लडके की शादी करने के पहले बचाउ की लड्की को जरुर देख लेना। कतवारु को इस तरह के सलाह की आशा न थी। इस सलाह से वह अपने को किन्कर्तव्य विमूढ सा महसूस कर रहा था। ठीक है सोचूगा।कतवारु ने कहा। ट्राली ठीक होने के बाद कतवारु उसे ले कर चल दिया।लेकिन शन्कर ने एक अजीब सी गुत्थी मे उसे डाल दिया था। आखिर आदमी सतरन्गी भावनाओ व विचारो का ही तो पुतला है् जिससे विश्व का सन्चालन होता है। कतवारु के मन मे विचारो का घमासान युद्ध धम्म धम्म कर शुरु हो चुका था तथा यह स्पस्ट नही हो रहा था कि पुराने व नये विचार मे कौन विजयी होगा।दो मे से कोई एक विचार को धराशाही होना है। क्रमश:
Wednesday, 19 March 2014
Thursday, 13 March 2014
आखिर एक दिन आया और शन्कर तेली को लगा कि कतवारु से आज बात करने का अcछा मौका है। गर्मी की चिलचिलाती धूप मे कतवारु जो ट्राली पर छ्ड लादे जा राहा था अचानक ट्राली के पन्चर होने से उसे रुकना पड गया। यो तो शायद बात न होती किन्तु बचाउ दोस्त काम सौप गया था इसलिये बात करनी जरुरी थी इसलिये--अरे कतवारु भैया बडी तेज धूप है हमारी दूकान मे आ जाओ छाह मिलेगी।शन्कर तेली ने आवाज दिया। शेठ्जी इस ट्राली को भी इसी समय पन्चर होना था शन्कर की दूकान मे पहुच कतवारु ने कहा। अरे बैठो पानी पियो और फिर अपनी समस्या को सुलझाओ।शन्कर तेली ने कहा।यहा तो पास मे कोइ पन्चर बनाने वाला भी नही है। पानी पीकर कतवारु बोला।शन्कर ने कहा। बात तो सही है पर एक तरीका है वह यह कि मुझसे सलाई रिन्च हथौडा लेकर पन्चर पहिया खोल कर ले आओ मेरा नौकर साइकिल से जा मोहन मिस्त्री से उसे बनवा लायेगा। शन्कर के इस प्रस्ताव से कतवारु खुश हो गया।स्वार्थ पूरा होने पर लोग खुश हो जाया ही करते ही है।जब नौकर पन्चर पहिया लेकर उसे बनवाने चला गया तो मौका पा धीरे से कतवारु से कहा। क्या बात है बचाउ धोबी आपके लडके को बहुत पसन्द करता है।कह रहा था कि इसके साथ अगर हमारी लडकी का व्याह हो जाय तो जोडा बडा अcछा लगता। अरे सेठ जी भला कैसी बात आप कर रहे है।भला ब्राम्ह्ण क्षत्री के घर धोबी की लडकी ब्याही जाती है।समाज हुक्का पानी बन्द कर देगा। क्रमश:
Saturday, 8 February 2014
शन्कर तेली के यहा से अपने घर लौट्ते
वक्त बचाऊ ने देखा कि चौराहे पर भीड जमी है।पूछ्ने पर यह पता चला कि समाजवादी दल, भर जाति के लोगो का सम्मेलन करके उन्हे अपनी सोई हस्ती का अहसास कर रहा है।बचाऊ सोचने लगा कि
सच तो यह है कि राजनीतिक पार्टी के ये चालाक नेता अपने कुर्सी के
स्वार्थ मे भोली भाली ,दिमाग से कुन्द जनता को ठग बस अपना उल्लू ही सीधा करते
है।अन्ग्रेजो ने हिन्दू मुसलमानो मे भेद पैदा कर भारत पर काफी वर्षो तक राज्य कर अपने देश के प्रति वफादारी का परिचय दिया।किन्तु
हमारे नेताओ ने अपने देश के धर्मो के साथ अनेक जातियो मे भी अपने को अलग अलग मह्सूस
करने का जहर भर दिया। अब ये राजनैतिक प्रेरणा से आपस मे लडते है, झगडते है और राजनीतिज्ञो
के गुप्त कुर्सी स्वार्थ की पूर्ति करते है।यह रहा भारतीय नेताओ का देशप्रेम्।अपनी
जातियता मे उलझा मनुष्य सन्कीर्ण मानसिकता का हो जाता है।किन्तु ज़ब गैर जाति मे
सम्बन्ध होता है तो मानसिकता का विकास होने से दूसरी जाति भी बिल्कुल अपनी लगने
लगती है और आपस मे वह एक मजबूत जुडाव की ओर अग्रसर होता है।
क्रमश:
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