शन्कर तेली के यहा से अपने घर लौट्ते
वक्त बचाऊ ने देखा कि चौराहे पर भीड जमी है।पूछ्ने पर यह पता चला कि समाजवादी दल, भर जाति के लोगो का सम्मेलन करके उन्हे अपनी सोई हस्ती का अहसास कर रहा है।बचाऊ सोचने लगा कि
सच तो यह है कि राजनीतिक पार्टी के ये चालाक नेता अपने कुर्सी के
स्वार्थ मे भोली भाली ,दिमाग से कुन्द जनता को ठग बस अपना उल्लू ही सीधा करते
है।अन्ग्रेजो ने हिन्दू मुसलमानो मे भेद पैदा कर भारत पर काफी वर्षो तक राज्य कर अपने देश के प्रति वफादारी का परिचय दिया।किन्तु
हमारे नेताओ ने अपने देश के धर्मो के साथ अनेक जातियो मे भी अपने को अलग अलग मह्सूस
करने का जहर भर दिया। अब ये राजनैतिक प्रेरणा से आपस मे लडते है, झगडते है और राजनीतिज्ञो
के गुप्त कुर्सी स्वार्थ की पूर्ति करते है।यह रहा भारतीय नेताओ का देशप्रेम्।अपनी
जातियता मे उलझा मनुष्य सन्कीर्ण मानसिकता का हो जाता है।किन्तु ज़ब गैर जाति मे
सम्बन्ध होता है तो मानसिकता का विकास होने से दूसरी जाति भी बिल्कुल अपनी लगने
लगती है और आपस मे वह एक मजबूत जुडाव की ओर अग्रसर होता है।
क्रमश: