Wednesday, 19 March 2014

भैया  किस समाज कि बात करते है? वही जो गरीबो का नही है।समाज भी ताकतवर का ही साथ देता हैं। यदि नेता मन्त्री,फ़िल्मी कलाकार या कोई धनवान आदमी गैर धर्म जाति मे विवाह कर ले तो वह महान है क्योकि उसने धर्म जाति की बेडी तोडी है्।किन्तु जब कोई गरीब एसा करे तो समाज मे थू थू।जहा समाज मे आदमी के लिये दो मापद्न्ड हो तो उस सडे समाज को छोड्ने मे ही भलाई है और बुद्धिमान यही करते भी है।रोटी,कपडा मकान हम अपनी मेहनत से जुटाते है समाज हमे मुफ़्त मे नही देता।फिर समाज की इतनी चिन्ता क्यो?कतवारु अपनी खुशी को निहारो और एसी लड्की घर मे लाओ जो घर मे अपने गुणो से आपके घर मे खुशिया ला सके।मै तुम्हारा इस नेक काम मे साथ दूगा।शादी करो या न करो क्योकि  वह तो उपर वाले की मर्जी से होती  है, लेकिन कहूगा कि एक बार अपने लडके की शादी करने के पहले बचाउ की लड्की को जरुर देख लेना। कतवारु को इस तरह के सलाह की आशा न थी। इस सलाह से वह अपने को किन्कर्तव्य विमूढ सा महसूस कर रहा था। ठीक है सोचूगा।कतवारु ने कहा।                                                                                                                             ट्राली ठीक होने के बाद कतवारु  उसे ले कर चल दिया।लेकिन शन्कर ने एक अजीब सी गुत्थी मे उसे डाल दिया था। आखिर आदमी सतरन्गी  भावनाओ व  विचारो का ही तो पुतला है् जिससे विश्व का सन्चालन होता है।  कतवारु के मन मे विचारो का घमासान युद्ध धम्म  धम्म  कर शुरु हो चुका था तथा यह स्पस्ट नही हो रहा था कि पुराने व नये विचार मे  कौन विजयी होगा।दो मे से कोई एक विचार को धराशाही होना है।                                                                                                               क्रमश:                                                                                          

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