आखिर एक दिन आया और शन्कर तेली को लगा कि कतवारु से आज बात करने का अcछा मौका है। गर्मी की चिलचिलाती धूप मे कतवारु जो ट्राली पर छ्ड लादे जा राहा था अचानक ट्राली के पन्चर होने से उसे रुकना पड गया। यो तो शायद बात न होती किन्तु बचाउ दोस्त काम सौप गया था इसलिये बात करनी जरुरी थी इसलिये--अरे कतवारु भैया बडी तेज धूप है हमारी दूकान मे आ जाओ छाह मिलेगी।शन्कर तेली ने आवाज दिया। शेठ्जी इस ट्राली को भी इसी समय पन्चर होना था शन्कर की दूकान मे पहुच कतवारु ने कहा। अरे बैठो पानी पियो और फिर अपनी समस्या को सुलझाओ।शन्कर तेली ने कहा।यहा तो पास मे कोइ पन्चर बनाने वाला भी नही है। पानी पीकर कतवारु बोला।शन्कर ने कहा। बात तो सही है पर एक तरीका है वह यह कि मुझसे सलाई रिन्च हथौडा लेकर पन्चर पहिया खोल कर ले आओ मेरा नौकर साइकिल से जा मोहन मिस्त्री से उसे बनवा लायेगा। शन्कर के इस प्रस्ताव से कतवारु खुश हो गया।स्वार्थ पूरा होने पर लोग खुश हो जाया ही करते ही है।जब नौकर पन्चर पहिया लेकर उसे बनवाने चला गया तो मौका पा धीरे से कतवारु से कहा। क्या बात है बचाउ धोबी आपके लडके को बहुत पसन्द करता है।कह रहा था कि इसके साथ अगर हमारी लडकी का व्याह हो जाय तो जोडा बडा अcछा लगता। अरे सेठ जी भला कैसी बात आप कर रहे है।भला ब्राम्ह्ण क्षत्री के घर धोबी की लडकी ब्याही जाती है।समाज हुक्का पानी बन्द कर देगा। क्रमश:
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