कहानी----
बचाऊ धोबी
गाँव का एक धोबी बचाऊ .बड़ा कंजूस व जुगाडू .दो दो शादिया की.एक औरत तीन औलाद छोडकर मर गई व दूसरी तीन औलाद के साथ बचाऊ के जीवन की कहानी आगे लिखने में सहयोग कर रही है.
देखने में भला
चंगा बचाऊ के जीने का अंदाज निराला है .रोज घर में शोर कर सबेरे कपडे के गठठर के
साथ घाट जाना उसकी मज़बूरी है. कभी कभी जब वह
मस्ती में होता तो धोबिया शैली का गाना गाने से भी न चूकता.
जवान होते ही वह
अपने पुस्तैनी पेशे में लग गया.कपड़ा धोना प्रेस करना उसे कायदे से रखना तथा कपड़ो
को ग्राहकों को देना लेना उसका रोज का काम है.पुस्तैनी पेशा होने से इस काम के
लिये उसे बाज़ार बनाने की कोई जरुरत भी न हुई.
सादा जीवन उच्च विचार के तहत वह सादा जीवन जीता ही जा रहा है. किन्तु विचार उसके कितने ऊचे है यह तय करना हम आप पर छोड़ते है. दूसरो से मिले पुराने
कपड़ो को साफ सुथरे ढंग से पहनना खुद द्वारा सिलाये गए कपडे को विशेष अवसर में
पहनने के लिये निकलना यह उसकी आदत है.
बचाऊ अपने पुस्तैनी काम के अलावा आमदनी बढiने के लिये कुछ
दुसरे छोटे मोटे काम भी
करता है. मसलन आज सुबह तडके मेरे घर पहुच उसने मुझे आवाज दिया –“बाबूजी घर के बाहर दरवाजे पर उगी घास साफ कर
दिया है, देख लेवे वरना कहेगे एक छोटा सा कiम दिया वो भी नहीं किया”. सोचा एहसान
के साथ काम का पूरा पैसा भी वसूलता है मक्कार कही का .
“अरे ठीक है उसे देखना क्या”.कहते हुए मैं अन्दर आ गया.
मैने सोचा कि इतने सबेरे क्या दू बाद में कुछ दे दूंगा. किन्तु ढीठ सा खड़ा वह मेरे कुछ देने का इंतजार करता रहा.पांच
मिनट के बाद उसने फिर पुकारा “बाबूजी तो फिर मै चलू”.”नहीं नहीं रुको मै आ रहा हूँ”. कहता
हुआ जाकर मैंने दस रुपये का नोट उसके हाथ पर रख दिये.मैं जानता था कि बगैर कुछ लिए
वह टसकने वाला नहीं है. नोट लेकर एक सेकेण्ड उसे खोलता मोड़ता रहा मानो कि मूक रुप से हमें चेता
रहा हो की भुगतान कुछ कम है ,बाबूजी आगे भुगतान बढ़ाने के लिये कुछ कीजिये वरना काम
होना मुश्किल है."अच्छi हम चलते है" कहकर वह आगे बढ़ गया. बचाऊ बड़ा ईमानदार व हिसाब का
पक्का है इसमे दो राय नहीं .सारा का सारा गाँव एक बचाऊ को छोडकर बेइमानी से मुफ्त
की बिजली जलाता है लेकिन वही है जो कनेक्शन लेने के पहले वर्सो तक मिट्टी का तेल
खरीद उससे ढेबरी जला घर रौशन किया करता था.वह मितव्ययिता से बिजली खर्चा कर उतना घर रौशन नहीं कर पता था जितना कि गाँव के बिजली चोर अपने
घर को रौशन कर लेते थे. उसकी पत्नी भी उसके इमानदारी से चिढती है.आप खाली इमानदारी
से अपने पत्नी को खुश नहीं कर सकते उसके लिये कुछ जोखिम उठानी पड़ेगी. गाँव के लोग उसे मूर्ख कहते.
क्रमशः
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